Dwarkadhish Shayari in Hindi — 30+ Best द्वारकाधीश शायरी
भगवान श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश स्वरूप पर लिखी गई द्वारकाधीश शायरी इन हिंदी हर भक्त के दिल को छू जाती है। द्वारका के राजा, मोर-मुकुटधारी कन्हैया की भक्ति में डूबी हर शायरी प्रेम, समर्पण और आस्था का अनमोल खजाना है। जब मन उदास हो या जीवन में अंधेरा छा जाए, तो द्वारकाधीश का पावन नाम और उनकी शायरी मन को असीम शांति देती है।
इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं 30+ बेहतरीन द्वारकाधीश शायरी — भक्ति, प्रेम, मित्रता और कृपा जैसे पावन विषयों पर। हर शायरी को आप कॉपी करके WhatsApp, Facebook और Telegram पर अपने दोस्तों व परिवार के साथ शेयर कर सकते हैं। अगर आपको प्रेरणादायक शायरी पसंद है तो हमारी संघर्ष पढ़ाई शायरी भी ज़रूर पढ़ें। तो आइए, द्वारकाधीश की भक्ति में डूबते हैं।
द्वारकाधीश भक्ति शायरी
द्वारका के राजा, भक्तों के पालनहार,
तेरे दरबार में झुका है ये संसार।
जो भी आया तेरे द्वार, द्वारकाधीश,
भर दी तूने उसकी झोली बार-बार॥
न द्वारका दूर है, न कन्हैया दूर,
जो सच्चे मन से पुकारे, वो ही मंज़ूर।
द्वारकाधीश सुनते हैं हर एक पुकार,
भक्तों के वास्ते खोलते हैं द्वार॥
मोर-मुकुट धारी, पीतांबर वाले,
द्वारका में विराजे हैं नंदलाला।
जिसकी नैया थामी तूने, कन्हैया,
डूबी न कभी वो इस भवसागर में॥
सुबह-शाम जपूँ मैं तेरा नाम,
द्वारकाधीश, हर लो मेरे काम।
तेरी कृपा से संवरता है भाग्य,
तेरे चरणों में मिलता है विश्राम॥
कंस का वध किया, धर्म की रक्षा की,
द्वारका बसाकर भक्तों की आशा की।
हे द्वारकाधीश, तेरी लीला अपार,
तेरे बिना सूना है ये संसार॥
जब-जब धरती पर बढ़ा अंधियारा,
तब-तब आया तू बनके सहारा।
द्वारकाधीश, तू ही पालनहार,
तेरी शरण में मिलता है किनारा॥
तेरे मंदिर की घंटी जब भी बजे,
मन मेरा वृंदावन-द्वारका सजे।
द्वारकाधीश, बस एक झलक दिखा दे,
इस भक्त के जीवन को सजा दे॥
न सोना चाहिए, न चाँदी चाहिए,
द्वारकाधीश, बस तेरी बंदगी चाहिए।
तेरे चरणों की धूल मिल जाए,
इससे बढ़कर और क्या चाहिए॥
कृष्ण प्रेम शायरी (राधा-कृष्ण)
राधा के श्याम, मीरा के गिरधर,
प्रेम का तू ही है सच्चा सागर।
द्वारकाधीश, प्रेमी तुझको पुकारे,
तेरे बिना नैना नीर बहारे॥
वृंदावन छोड़ा, द्वारका बसाई,
फिर भी राधा तेरे दिल में समाई।
प्रेम की ये कैसी रीत निभाई,
द्वारकाधीश, तूने प्रीत सिखाई॥
मीरा ने पिया विष का प्याला,
फिर भी न छोड़ा कृष्ण-गोपाला।
ऐसा प्रेम, ऐसी भक्ति निराली,
द्वारकाधीश की महिमा मतवाली॥
राधा बिना अधूरे हैं कन्हैया,
प्रेम बिना सूनी है हर छैया।
द्वारकाधीश, प्रेम का पाठ पढ़ा दे,
टूटे दिलों को फिर से जड़ा दे॥
गोपियों के संग रास रचाया,
प्रेम का अनुपम पाठ पढ़ाया।
हे द्वारकाधीश, हे मनमोहन,
तेरे प्रेम में डूबा है ये मन॥
जिस दिल में बसे हैं द्वारकाधीश,
उस दिल में न रहता कोई क्लेश।
प्रेम की गंगा बहती है वहाँ,
जहाँ कृष्ण का होता है वास॥
मोर-मुकुट और बांसुरी शायरी
मोर-मुकुट सिर पर सजे,
बांसुरी अधरों पर बजे।
द्वारकाधीश की छवि निराली,
मन को मोह ले मतवाली॥
बांसुरी की धुन जब भी बजे,
सारा जगत थम-सा जाए।
द्वारकाधीश, तेरी मुरली की तान,
हर लेती है सबके प्राण॥
पीतांबर ओढ़े, मोर-मुकुट धारे,
द्वारका के राजा सबसे प्यारे।
एक झलक तेरी पाने को,
तरसते हैं नैना हमारे॥
मुरलीवाले, तेरी मुरली कमाल,
सुनकर झूम उठे सारा जहान।
द्वारकाधीश, बजा दे एक तान,
मिट जाए मन का हर अरमान॥
काली घटा, मोर-मुकुट की छाया,
द्वारकाधीश ने मन मोह लिया।
जिसने देखी तेरी सूरत, कन्हैया,
वो तो तेरा ही हो लिया॥
सुदामा-मिलन शायरी (मित्रता)
सुदामा के तंदुल, कृष्ण की प्रीत,
मित्रता की ये अमर रीत।
द्वारकाधीश ने गले लगाया,
मित्र को राजा बना दिखाया॥
न धन देखा, न दौलत देखी,
द्वारकाधीश ने मित्रता देखी।
सुदामा के चरण पखारे,
आँसुओं से पाँव धुलारे॥
मित्र हो तो कृष्ण जैसा,
जो निभाए साथ हर पल ऐसा।
द्वारकाधीश, सिखा दे ये हुनर,
मित्रता निभाएँ उम्र भर॥
टूटी झोपड़ी महल बनाई,
सुदामा की किस्मत चमकाई।
द्वारकाधीश की कृपा अपार,
मित्र के लिए लुटा दिया संसार॥
द्वारका नगरी शायरी
सोने की द्वारका, सागर किनारे,
द्वारकाधीश जहाँ राज दुलारे।
जो भी जाए उस नगरी एक बार,
मिट जाएँ उसके सारे विकार॥
समुद्र की लहरें करतीं जयकार,
द्वारका में गूँजे कृष्ण के द्वार।
हे द्वारकाधीश, बुला ले हमें,
तेरे दर्शन को तरसते हैं नैन॥
द्वारका धाम, पावन धरती,
जहाँ कृष्ण की महिमा बसती।
जो करे वहाँ जाकर स्नान,
धुल जाएँ उसके सारे गुनाह॥
चार धामों में एक द्वारका,
मोक्ष का द्वार, पुण्य का सार।
द्वारकाधीश के दर्शन कर लो,
जीवन सफल बना लो॥
कृपा और संकट-हरण शायरी
जब नैया डूबने लगे मझधार,
द्वारकाधीश आते हैं पतवार।
भक्तों के संकट हर लेते हैं,
डूबतों को किनारा देते हैं॥
द्रौपदी की लाज बचाई,
भक्तों की हमेशा सहाय की।
हे द्वारकाधीश, हे करुणानिधान,
तेरी कृपा से चलता है जहान॥
हारकर जो तेरे द्वार आया,
खाली हाथ कभी न वो जाया।
द्वारकाधीश, तेरी शरण में,
मिलता है सच्चा सुख जीवन में॥
निष्कर्ष
द्वारकाधीश की भक्ति में लिखी गई ये शायरियाँ सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि आस्था और प्रेम की गहरी भावनाएँ हैं। चाहे आप सुबह की शुरुआत कृष्ण-भजन से करना चाहें या किसी अपने को भक्तिमय शुभकामना भेजना चाहें — ये द्वारकाधीश शायरी हर मौके पर आपके काम आएगी। इन्हें कॉपी करके अपनों के साथ ज़रूर शेयर करें और ऐसी ही और सुंदर शायरियों के लिए धाकड़ शायरी पढ़ते रहें। जय द्वारकाधीश!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
द्वारकाधीश कौन हैं?
द्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण का वह पावन स्वरूप है, जब वे मथुरा छोड़कर द्वारका नगरी के राजा बने। “द्वारका” + “अधीश” (स्वामी) से मिलकर बना यह नाम “द्वारका के स्वामी” का बोध कराता है।
द्वारकाधीश शायरी किस अवसर पर शेयर करें?
जन्माष्टमी, एकादशी, मंदिर दर्शन, सुबह की शुभकामनाओं या जब भी मन भक्ति से भर जाए — इन शायरियों को आप किसी भी पावन अवसर पर WhatsApp, Facebook और Telegram पर शेयर कर सकते हैं।
क्या मैं ये शायरी कॉपी करके शेयर कर सकता हूँ?
बिल्कुल! हर शायरी के साथ कॉपी बटन और Facebook, WhatsApp व Telegram शेयर बटन दिए गए हैं। आप इन्हें आसानी से कॉपी करके अपने दोस्तों और परिवार के साथ बाँट सकते हैं।
द्वारका धाम कहाँ स्थित है?
द्वारका धाम गुजरात राज्य में अरब सागर के तट पर स्थित है। यह हिंदू धर्म के चार धामों में से एक है और यहाँ स्थित द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) भगवान कृष्ण को समर्पित प्रमुख तीर्थ है।
द्वारकाधीश के सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन से हैं?
गुजरात के द्वारका में स्थित द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) सबसे प्रसिद्ध है, जिसे भगवान कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने बनवाया था। इसके अलावा मथुरा, उज्जैन और भारत के कई शहरों में भी द्वारकाधीश मंदिर हैं।
